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मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार
मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

पूर्वी दिल्ली : ( अर्श न्यूज ) – मयूर विहार स्थित दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम पर्व की तैयारी अपने अंतिम चरण में पहुंच गई हैं ज्ञात रहे की भगवान विष्णु के 10 अवतारों में से पांचवें अवतार वामन देव की जयंती स्वरूप ओणम पर्व केरल राज्य में पूरे विधि विधान के साथ मनाया जाता है

मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

तीन पदों में पूरी सृष्टि नापते हुए राजा महाबली को वामन अवतार ने मोक्ष प्रदान किया था उल्लेखनीय है की राजा बलि असुर होने के बावजूद धर्मात्मा वी दानवीर थे उनका यश और कीर्ति से इंद्रदेव भी भयभीत थे

मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

वामन अवतार का जन्म इंद्रदेव को राजा बलि के भाई से मुक्ति दिलवाने के लिए हुआ किम विदंती है कि वामन अवतार ने राजा बलि को यह वरदान दिया कि वह वर्ष में एक बार अपनी प्रजा से मिलने के लिए पृथ्वी लोक पर आ सकते हैं

मयूर विहार फेस 1 के दक्षिण भारतीय मंदिर उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर में ओणम के लिए  तैयार

केरल राज्य में मान्यता है कि राजा बलि ओणम के दिन ही अपनी प्रजा से मिलने के लिए पृथ्वी लोक पर आते हैं और इसी दिन को ओणम पर्व के रूप में सभी मलयाली भाषा भाषी पूरे विधि विधान के साथ इस पर्व को उत्सव रूप में मन कर अपने इष्ट देव की पूजा अर्चना करते हैं

विभिन्न मान्यताओं के अनुसार यह पर्व फसल के पकने से भी जुड़ा हुआ है

मयूर विहार स्थित उत्तरा गुरुवायुरप्पन मंदिर के पदाधिकारी के अनुसार ओणम पर्व के दिन मंदिर प्रांगण में 5000 श्रद्धालुओं के आगमन के साथी भोजन प्रसाद का विशेष प्रबंध रहता है

मंदिर प्रबंधन को का तर्क है कि ओणम पर्व के शुभ अवसर पर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु लोग मयूर विहार स्थित मंदिर में आकर अपने आराध्य देव की आराधना कर धर्म लाभ अर्जित करते हैं

मंदिर प्रांगण में भगवान विष्णु के पग चपटी हुई मां लक्ष्मी का मनोहारी चित्रांकन हो

या फिर नरसिंह भगवान का छायाचित्र

कुरुक्षेत्र की भूमि में गांडीवधारी अर्जुन के सारथी बने हुए भगवान श्री कृष्णा

मंदिर परिसर में संखी जेल में लेट जिओ का सौंदर्य मंदिर परिसर की शोभा को द्विगुणित कर देता है

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